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Sample LessonHindi · Level 2–3Panchatantra

बंदर और मगर की मित्रता

The Monkey and the Crocodile

A friendly monkey in a mango tree talking to a crocodile in the river below

This is a free sample from the Hindi Level 2–3 curriculum — students at this stage read and narrate stories like this one from the Panchatantra. Full lesson libraries, with vocabulary and comprehension exercises, are available to enrolled students. See the Hindi course page for level details.

एक नदी के किनारे आम का एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर एक बंदर रहता था। वह बहुत चंचल और खेलकूद करने वाला था। दिन भर वह नदी के तट पर दूसरे बंदरों के साथ खेलता। कभी वह एक डाली से दूसरी डाली पर छलाँग लगाता, कभी अपनी पूँछ के सहारे झूलता और कभी नदी में छोटे-छोटे कंकड़ फेंककर गोल-गोल लहरें बनाता।

जब उसे भूख लगती, तो वह पेड़ से पके हुए रसीले आम तोड़कर खाता। शाम होने पर दूसरे बंदर जंगल में लौट जाते और वह अपने आम के पेड़ पर आराम से सो जाता।

एक दिन एक मगर नदी में घूमता-फिरता उस पेड़ के पास आया। बहुत देर तक तैरने के कारण वह थक गया था। वह नदी के तट पर आकर लेट गया और धूप सेंकने लगा।

बंदर ने मगर को पहले कभी नहीं देखा था। दूर से मगर उसे किसी बड़े पत्थर जैसा दिखाई दिया। उत्सुक बंदर एक डाली से दूसरी डाली पर कूदता हुआ उसके पास पहुँचा। उसने ऊपर से झाँककर देखा, लेकिन मगर बिल्कुल नहीं हिला।

बंदर ने हँसकर पूछा, “अरे भाई! तुम कोई पत्थर हो या कोई जीव? इतनी देर से बिल्कुल हिले भी नहीं!”

मगर ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराकर कहा, “मैं पत्थर नहीं, मगर हूँ। बहुत दूर से तैरता हुआ आया हूँ। थक गया था, इसलिए यहाँ धूप सेंक रहा हूँ।”

“क्या तुम्हें भूख भी लगी है?” बंदर ने पूछा।

“हाँ, थोड़ी-सी,” मगर ने उत्तर दिया, “लेकिन यहाँ मेरे खाने के लिए कुछ नहीं है।”

बंदर ने तुरंत एक पका हुआ आम तोड़ा और कहा, “तो फिर मुँह खोलो और इसे पकड़ो!”

उसने आम नीचे फेंका और मगर ने झट से उसे अपने मुँह में पकड़ लिया। आम इतना मीठा और रसीला था कि मगर उसे खाकर बहुत खुश हुआ।

“वाह! मैंने इतना स्वादिष्ट फल पहले कभी नहीं खाया,” मगर ने कहा।

The monkey drops a ripe mango from the tree to the crocodile waiting below with an open mouth

बंदर ने उसे कुछ और आम दिए। दोनों देर तक बातें करते रहे। शाम होने पर मगर ने बंदर को धन्यवाद दिया और अपने घर लौट गया।

अगले दिन मगर फिर आम के पेड़ के पास आया। बंदर उसे देखकर बहुत खुश हुआ। अब दोनों ने एक नया खेल शुरू कर दिया। बंदर पेड़ से आम फेंकता और मगर उन्हें मुँह से पकड़ता। कभी मगर अपनी पूँछ से पानी उछालता और बंदर हँसते हुए एक डाली से दूसरी डाली पर कूदकर स्वयं को भीगने से बचाता।

धीरे-धीरे मगर रोज़ वहाँ आने लगा। दोनों साथ खेलते, मीठे आम खाते और एक-दूसरे को अपने दिन की बातें सुनाते। इस प्रकार बंदर और मगर के बीच बहुत गहरी मित्रता हो गई।

मगर की पत्नी की इच्छा

एक दिन शाम को घर जाते समय मगर ने बंदर से कहा, “मित्र, क्या मैं कुछ आम अपनी पत्नी के लिए भी ले जाऊँ?”

बंदर हँसकर बोला, “अरे, यह भी कोई पूछने की बात है! ज़रूर ले जाओ।”

यह कहकर बंदर ने बहुत सारे पके हुए आम तोड़े और मगर को दे दिए।

मगर ने घर पहुँचकर वे आम अपनी पत्नी को दिए। उसने पत्नी को बंदर के साथ हुई अपनी मित्रता के बारे में भी बताया।

मगर की पत्नी ने जैसे ही पहला आम खाया, उसकी आँखें खुशी से चमक उठीं।

“ये आम तो बहुत मीठे हैं!” उसने कहा। “क्या तुम्हारा मित्र रोज़ ऐसे ही आम खाता है?”

“हाँ,” मगर ने उत्तर दिया, “वह उसी आम के पेड़ पर रहता है। वह रोज़ मुझे भी बड़े प्रेम से आम खिलाता है।”

मगर की पत्नी कुछ देर सोचती रही। फिर वह बोली, “यदि ये आम इतने मीठे हैं, तो जो बंदर रोज़ इन्हें खाता है, उसका कलेजा कितना मीठा होगा!”

मगर उसकी बात सुनकर चौंक गया।

उसकी पत्नी आगे बोली, “मैं उस बंदर का मीठा कलेजा खाना चाहती हूँ। तुम किसी बहाने से उसे अपने घर ले आओ। फिर हम उसे मारकर उसका कलेजा खाएँगे।”

मगर घबराकर बोला, “तुम कैसी बातें कर रही हो? बंदर मेरा जिगरी दोस्त है। वह रोज़ मुझे प्रेम से आम खिलाता है। मैं भला उसे कैसे मार सकता हूँ?”

लेकिन मगर की पत्नी अपनी ज़िद पर अड़ी रही।

उसने कहा, “यदि तुम बंदर को यहाँ नहीं लाओगे, तो मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगी और न ही कुछ खाऊँगी।”

मगर ने उसे बहुत समझाया, लेकिन उसने उसकी एक न सुनी। वह मगर से मुँह फेरकर बैठ गई।

मगर दुविधा में पड़ गया। एक ओर उसकी पत्नी की ज़िद थी और दूसरी ओर उसका प्रिय मित्र। वह पूरी रात ठीक से सो नहीं पाया। अंत में पत्नी के दबाव में आकर उसने उसकी बात मान ली।

The crocodile's wife, tasting the mangoes, dreams up her scheme to eat the monkey's heart

भोजन का निमंत्रण

हर रोज़ की तरह अगले दिन मगर बंदर से मिलने नदी के तट पर गया। लेकिन आज वह न तो खुश दिखाई दे रहा था और न ही उसने बंदर के साथ कोई खेल खेला।

बंदर ने पूछा, “क्या बात है, मित्र? आज तुम इतने चुप क्यों हो?”

मगर ने अपनी उदासी छिपाते हुए कहा, “कुछ नहीं, मित्र। कल मैं तुम्हारे दिए हुए आम अपनी पत्नी के लिए ले गया था। उसे वे बहुत पसंद आए। जब मैंने उसे तुम्हारे बारे में बताया, तो वह बोली कि इतने अच्छे मित्र को अब तक घर क्यों नहीं बुलाया।”

मगर ने आगे कहा, “वह तुमसे मिलना चाहती है। उसने आज शाम तुम्हें हमारे घर भोजन पर बुलाया है।”

बंदर खुशी-खुशी तैयार हो गया। फिर अचानक उसे कुछ याद आया।

उसने कहा, “लेकिन मगर भाई, मुझे तो तैरना नहीं आता। मैं नदी के बीच बने तुम्हारे घर तक कैसे जाऊँगा?”

मगर मुस्कुराते हुए बोला, “इसमें कौन-सी परेशानी है? तुम मेरी पीठ पर बैठ जाना। मैं तैरकर तुम्हें अपने घर ले जाऊँगा और भोजन के बाद वापस यहाँ पहुँचा दूँगा।”

बंदर को अपने मित्र पर पूरा विश्वास था। वह पेड़ से नीचे उतरा और उछलकर मगर की पीठ पर बैठ गया।

नदी के बीच में

मगर बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी में तैरने लगा। शुरू में बंदर को इस यात्रा में बहुत आनंद आया। वह चारों ओर फैले पानी, तैरती मछलियों और दूर दिखाई देते पेड़ों को देखकर खुश हो रहा था।

जब वे नदी के बीच में पहुँचे, तो पानी बहुत गहरा हो गया। मगर धीरे-धीरे पानी के भीतर उतरने लगा।

बंदर डर गया और मगर की पीठ को कसकर पकड़ते हुए बोला, “मित्र, ज़रा संभलकर तैरो! मैं पानी में गिर गया तो डूब जाऊँगा।”

मगर को अपने मित्र से छल करने पर बहुत बुरा लग रहा था। अब वह सच्चाई अधिक देर तक नहीं छिपा सका।

उसने उदास होकर कहा, “मित्र, मुझे क्षमा कर दो। मेरी पत्नी ने तुम्हें भोजन कराने के लिए नहीं बुलाया है। वह तुम्हारा कलेजा खाना चाहती है। मैं तुम्हें उसी के पास लेकर जा रहा हूँ।”

यह सुनते ही बंदर बहुत डर गया। अब न तो वह पेड़ पर लौट सकता था और न ही नदी में तैर सकता था। फिर भी उसने अपना धैर्य नहीं खोया। उसने आँखें बंद कीं और तुरंत बचने का एक उपाय सोच लिया।

कुछ क्षण बाद वह शांत होकर बोला, “अरे मित्र! तुमने यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?”

मगर ने हैरानी से पूछा, “क्यों? पहले बताने से क्या होता?”

बंदर बोला, “हम बंदर अपना कलेजा हमेशा अपने साथ लेकर नहीं घूमते। पेड़ों पर इतनी ऊँची छलाँगें लगाते समय उसके टूटने का डर रहता है। इसलिए मैं अपना कलेजा आम के पेड़ की एक खोखली डाल में सुरक्षित रखकर आया हूँ।”

भोले मगर ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया।

बंदर ने कहा, “तुम्हारी पत्नी ने मुझे पहली बार भोजन पर बुलाया है। मैं भला खाली हाथ कैसे जा सकता हूँ? चलो, हम वापस चलते हैं। मैं अपना मीठा कलेजा लेकर तुम्हारे साथ चलूँगा।”

“यह तो मैंने सोचा ही नहीं!” मगर बोला।

उसने तुरंत अपनी दिशा बदली और बंदर को लेकर आम के पेड़ की ओर तैरने लगा।

The monkey, sitting on the crocodile's back in the middle of the river, thinks up his clever plan

बंदर की चतुराई

जैसे ही मगर नदी के किनारे पहुँचा, बंदर ने उसकी पीठ से लंबी छलाँग लगाई और झटपट अपने पेड़ पर चढ़ गया। वह सबसे ऊँची और सुरक्षित डाली पर जाकर बैठ गया।

मगर कुछ देर उसकी प्रतीक्षा करता रहा। फिर उसने आवाज़ लगाई, “मित्र, जल्दी से अपना कलेजा लेकर आओ। हमें घर पहुँचने में देर हो रही है।”

बंदर ने ऊपर से उत्तर दिया, “मूर्ख मगर! क्या कोई अपना कलेजा शरीर से निकालकर पेड़ पर रख सकता है?”

मगर को तुरंत अपनी मूर्खता समझ में आ गई।

बंदर ने दुखी होकर कहा, “मैंने तुम्हें अपना सच्चा मित्र समझा था। तुम्हें मीठे आम खिलाए और तुम पर विश्वास किया। लेकिन तुमने अपनी पत्नी की बात मानकर मुझे मारने की योजना बना ली। तुमने हमारी मित्रता और मेरे विश्वास—दोनों को तोड़ दिया है।”

मगर ने शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया।

उसने कहा, “मित्र, मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। कृपया मुझे क्षमा कर दो।”

बंदर बोला, “मैं तुम्हें तुम्हारी भूल के लिए क्षमा कर सकता हूँ, लेकिन अब तुम पर पहले जैसा विश्वास नहीं कर सकता। सच्चा मित्र कभी अपने मित्र को धोखा नहीं देता।”

मगर को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। वह चुपचाप नदी में लौट गया।

बंदर ने अपनी बुद्धि और धैर्य से अपनी जान बचा ली। इसके बाद वह पहले की तरह आम के पेड़ पर रहने लगा, लेकिन उसने निश्चय किया कि भविष्य में वह किसी पर आँखें बंद करके विश्वास नहीं करेगा।

The monkey safely back in the mango tree, looking down at the ashamed, tearful crocodile in the river

कहानी की सीख — The Moral

संकट के समय घबराना नहीं चाहिए। धैर्य और बुद्धि से बड़ी-से-बड़ी कठिनाई से बचा जा सकता है। साथ ही, जो व्यक्ति मित्रता का विश्वास तोड़ दे, उस पर आँखें बंद करके दोबारा विश्वास नहीं करना चाहिए।

Enjoyed this story? This is just a sample of what students read, narrate, and discuss in our Hindi Level 2–3 classes — Fall 2026 registration is open now.

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